Md. Mustafiz Raza

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(NOTE:-NO SHAYARI HAS BEEN TAKEN FROM ANYWHERE ELSE, IT'S ALL MADE BY OWN). Also the poetry available here has been respecitively credited to their original writer. Keep Visiting. Thank you for your time.

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Friday, July 29, 2022

Translation:- Hai Khayal-e-husn mei husn-e-amal ka sa khayal ( Mirza Ghalib)


Hai khayal-e-husn mei husn-e-amal ka sa khayal
Ek Khuld ka dar hai meri gor ke andar khula

Amal:- deed/ काम
Khuld:-Heaven/ जन्नत
Gor:- Grave/ कबर 

ग़ालिब की शायरी में एक और कीमती नगीना। ग़ालिब की के खयाल के बारे में जितनी तारीफ करें उतना कम है।

ख़ुदा की रहमत की मिसाल दे रहा है ग़ालिब।
कहते हैं की 
एक ख़्याल है की में अपनी जिंदगी में कुछ अच्छा काम किया होऊंगा। किया होगा या ना होगा वो बाद की बात है। बस ख़्याल आया की कुछ अच्छे काम किया है मैने।

इतना सोचना ही था की ख़ुदा की रहमत देखिए की मेरी कबर में जन्नत की खिड़की खुल गई।

ऐसे शेर बस ग़ालिब ही लिख सकते थे। कमाल की समझ ही उन्हे हर चीज़ की। और क्या कमाल का जर्फ है उनकी शायरी में।


Thursday, July 28, 2022

Translation:- Taa'at mei taa rahe na mai-o-angbeeñ ki laag ( Mirza Ghalib)


Taa'at mei taa rahe na mai-o-angbeeñ ki laag
Dozakh mei daal do koi le kar bahisht ko

Taa'at:- Devotion / इबादत
Mai-o-angbeeñ:- Wine and honey
Dozakh:- जहन्नुम/ Hell
Bahisht:- Heaven / जन्नत 


इबादत में कभी लालच नहीं रखना की जन्नत मिलेगी। जन्नत में शराब ए तुहूर मिलेगा। किसी तरह का लालच नहीं रहना चाहिए।
इबादत तो इसी लिए की जानी है क्यों की वो उसका हक है।

जन्नत को जहन्नुम में डाल दो। ऐसा ऐसा है तो जन्नत जैसा कुछ रहना ही नही चाहिए।
मिर्ज़ा ग़ालिब यहां अपनी बेमिसाल समझदारी और इल्म का सुबूत दे रहे हैं। 



Wednesday, July 27, 2022

Translation:- Na Tha Kuchh To Khuda Tha ( Mirza Ghalib )


Na tha kuch toh khuda tha, kuch na hota toh khuda hota
Duboyaa mujh ko hone ne, na hota main to kya hota

जब कुछ नहीं था, तो भगवान थे.. कुछ नहीं होते तो भगवान होते।
शून्यता / Emptiness  में, ईश्वर तब भी मौजूद रहेगा। शून्य में केवल ईश्वर ही होगा। शुरुआत में भगवान के अलावा कुछ भी नहीं था।
 अगर कुछ नहीं होता तो भगवान तब भी होते। मेरे वजूद ने मुझे निराश किया है।
बनने (मेरे होने) ने मुझे हरा दिया है। अगर मेरा वजूद नहीं होता तो मैं क्या होता? अगर मेरा वजूद न होता तो क्या नुकसान होता?
इन दो पंक्तियों का एक वैकल्पिक अर्थ हो सकता है -
अगर मैं कुछ नहीं होता, तो मैं भगवान होता। अगर मैं कुछ भी नहीं हूं, तो मैं भगवान होता, जिसका अर्थ है कि भगवान एक व्यक्तिगत अनुभव है। 
अब ईश्वर बनकर मैं मानव अस्तित्व के सभी दोषों और भ्रष्टाचारों से अपने सच्चे स्व से अलग हो गया हूं। मेरा जीवन क्या अच्छा था? अगर मैं अस्तित्व में नहीं होता, तो क्या यह वास्तव में मायने रखता था?


Hua jab gham se yuun behis to gham kya sar ke katne ka
Na hota gar judaa tan se to zaannon par dharaa hota

इतना जो ग़म पहले से झेला आया हूं तो इस सर का काटने में क्या ग़म होगा। ग़ालिब कहते हैं की पहले से मेरे अंदर इतना ग़म है और में इतना सुन्न हो चुका हूं की अगर मेरा सर कट भी जाए तो कुछ फर्क नही पड़ने वाला। अपने दुख के चेहरा दिखा रहे हैं ग़ालिब।
अगर कट के जांघों पर भी आ जाता तो क्या ही फर्क पड़ता था।

जब चारों ओर की पीड़ा और पीड़ा से केवल अस्तित्व ही बोझ और अभिशाप बन गया है, तो सिर कटने का दर्द क्या है? भगवान में मेरे विश्वास के नुकसान ने जीवन को ऐसा दुख बना दिया है कि मर गया।
यदि इसे काटा नहीं जाता (क्योंकि ईश्वर दयालु है, और वह इस हिंसक मृत्यु से मेरे जीवन को बचा लेता है), तो यह हमेशा भगवान की भक्ति में मेरे घुटनों पर झुक जाता है ताकि मेरे अविश्वासियों को ठीक किया जा सके।


Hui muddat ke ghalib mar gayaa par yaad aataa hai
Woh har ek baat pe kahna ke yuun hota to kya hota


ग़ालिब कहते हैं की मेरे जाने के बाद भी मुझे याद किया जाएगा। जो हर चीज़ पर वाजिब सवाल करते थे।
गालिब को गुजरे हुए काफी समय हो गया है, लेकिन वो आज भी याद करते हैं। बार-बार यही कहना कि अगर ऐसा न होता तो कैसे होता?
यह सोच कि अगर मैंने अपना जीवन अलग तरीके से जिया होता ( सही तरीके से चलता ) तो मैं क्या होता। क्या यह मायने रखता था? क्या यह मृत्यु के अलावा कुछ और होता क्योंकि घटना।


Translation:- Na-karda gunahoñ ki bhi hasrat ki mile daad ( Mirza Ghalib)


Na-karda gunahoñ ki bhi hasrat ki mile daad
Yaa rab agar in karda gunahoñ ki sazaa hai 

Na-karda:- Not Done / नहीं किया
Hasrat:- Wish/ ख्वाहिश
Daad:- Compliment/ तारीफ

इस शेर को समझने के लिए दूसरे शेर को पहले पढ़ें।
2nd line:- अगर किए हुवे गुनाहों की सज़ा मिलेगी।
1st line:- तो फिर उन गुनाहों की तारीफ तो कर जो मेरी ख्वाहिश में ही रह गए, जो मै कर नहीं पाया।

ग़ालिब की अपार और बेमिसाल सोच का एक और उदाहरण इस शेर के जरिए मिलता है। ग़ालिब की सोच हम आम लोगों के सोच के बहुत 

Translation:- Va-hasrata ke yaar ne khincha sitam se haath ( Mirza Ghalib )


Va-hasrata ke yaar ne khiñcha sitam se haath
Ham ko Harees-e-lazzat-e-azaar dekh kar

Va-hasrata:- Regrets / अफसोस
Sitam:- Violence / Injustice/ ज़ुल्म
Harees-e-lazzat-e-azaar:- Greedy for the pleasure of pain / दर्द की भूख 

अफसोस मेरे यार / प्यार ने तब सितम करना बंद कर दिया। जब उसने देखा की मुझे उस सितम से मज़ा आने लगा।
जब तक मुझे तकलीफ हो रही थी तब तक वो सितम कर रही थी।
पर जब उस ने देखा की मुझे उस सितम की आदत हो गई है और मुझे मज़ा आ रहा है, उसने सितम करना बंद कर दिया।

Translation:- Rone se aur ishq mein be-baak ho gaye ( Mirza Ghalib )


Rone se aur ishq mein be-baak ho gaye
Dhoye gaye hum aise ki bas paak ho gaye

कवि कहते हैं जोश के कारण रोने से हम और भी निडर हो गए हैं।
हम प्यार में विनम्र और मौन रहते थे, ज्यादा खुलासा नहीं करते थे।
लेकिन जोश का यह दर्द जो मुझे रुला रहा है, मुझे अपने प्रेमी की खोज में निडर और निडर बना रहा है।
मैं अब यह सब जोखिम में डालने को तैयार हूं।
हमारे अपने आंसुओं ने हमें इतना धो डाला है कि हम फिर से शुद्ध हो गए हैं।
पहले दर्द का रोना था, अब प्रायश्चित का
हमने शुद्ध होने के लिए जितना हो सके उतना पश्चाताप किया है।
 "Bas" का एक माने ये भी हो सकता है।
एक निरंतर निडर लकीर व्यक्त करेंगे। अपनी हिम्मत को दिखाना की ' Bas bohot ho gaya'.
अभि बहोत हो गया! हम अब स्वतंत्र हैं। अब और रोना नहीं. कोई और पश्चाताप नहीं।

Sarf-e-bahaa-e-mai hue aalaat-e-maikashi
The yeh hi do hisaab so yuñ paak ho gaye

शराब पीने का हमारा बर्तन/कप शराब की कीमत का खर्च बन गया है।
हमारे केवल दो अनुमान थे, इसलिए वे भी सभी साफ़ हो गए हैं। कवि कहता है कि हमारे पास केवल दो चिंताएँ थीं जिन पर काम करने की ज़रूरत थी। अब वो भी नही रहे।
एक तो हम शराब पीने के पैसे कहां से लाएंगे और दूसरा शराब पीने के बर्तन कहां से सुरक्षित रखेंगे।
अब जब हमने शराब का भुगतान करने के लिए बर्तन भी बेच दिए हैं, तो हम उन सभी चिंताओं से मुक्त हो गए हैं।

इस तरह ("युन्न"... जैसे कि दुनिया को यह दिखाने के लिए कि उसने अपने वित्त को कैसे साफ किया है) मैं रकम और गणना और अनुमानों की दुनिया से दूर हो गया हूं।

Rusava-e-dahar go hue avaargi se tum
Baare tabiyaton ke to chalaak ho gaye

भले ही आप भटकने से दुनिया से बदनाम हो गए हों।
अंत में, आप अपने स्वभाव में चतुर हो गए हैं। कवि शायद अपनी जवानी के दिनों को याद करते हुए कहता है कि भटकते और दुनिया में खोए रहने के उन दिनों ने उसे बदनाम और प्रभावित कर दिया।

Kahta hai kaun nala-e-bulbul ko be-asar
Parde mein gul ke laakh jigar chaak ho gaye

कौन कहता है कि बुलबुल का चमक अप्रभावी है। परदे के गुलाब में, एक लाख कलेजे फट जाते हैं (या फट जाते हैं)। विशुद्ध रूप से काल्पनिक वास्तव में!
कवि कहता है कि कौन कहता है कि बुलबुल के रोने का कोई असर नहीं होता। निश्चित रूप से वे जाकर देख सकते हैं कि इसका गुलाब पर क्या प्रभाव पड़ता है


Puche hai kya wajud-o-adam ahl-e-shauq ka
Aap apni aag ke khas-o-khashak ho gaye

जोश के लोगों के अस्तित्व और गैर-अस्तित्व के बारे में पूछें। तुम ही अपनी आग के तिनके और लकड़बग्घे बने हो।
कवि कहता है कि जुनून और जोश के लोग अस्तित्व और गैर-अस्तित्व की क्या परवाह करते हैं। 
यह उनके लिए समान है क्योंकि वे हर चीज से बेखबर हैं। उनसे क्या पूछें! वे स्वयं अपनी आग के ईंधन हैं। वे सूखे भूसे और लकड़ी के कूड़े की तरह जलते हैं।


Karne gaye the us se tagaful ka ham gila
Ki ek hi nigah ki bas khaak ho gaye

हम उसकी उदासीनता के बारे में शिकायत करने उसके पास गए थे। उसकी तरफ़ से बस यही एक नज़र, बस इतना ही! - हम धूल बन गए हैं। 
कवयित्री कहती है कि हम ठीक नहीं थे जब उसने मुझे अपनी नज़र और हवा से नहलाया (उदासीनता दिखाते हुए) और हम अभी भी ठीक नहीं हैं जब उसने मुझे एक नज़र दी, क्योंकि हम अब धूल में बदल गए थे! ईआईटी


Is rang se uthai kal us ne ‘Asad’ ki laash
Dushman bhi jis ko dekh ke gam-naak ho gaye


ऐसे में उन्होंने कल असद की लाश को उठा लिया. जिसे देखकर शत्रु भी शोक से भर उठा। कवयित्री कहती है कि ऐसे अंदाज में उन्होंने असद के शरीर को उठाया।
सटीक शैली या ढंग का संकेत नहीं दिया गया है। यह पूरी तरह से अवमानना ​​या अत्यंत सम्मान के साथ हो सकता है। 

और यह देख कर शत्रुओं का हृदय शोक से भर गया (यह भी किसी भी प्रकार से हो सकता है, कोई पत्थर-हृदय शत्रु प्रिय का सम्मान देखकर पिघल जाता है या प्रियतम का तिरस्कार देखकर.


Monday, July 25, 2022

Translation:- Rahiye Ab Aisi Jagah Chal Kar Jahan Koi Na Ho ( Mirza Ghalib )


Rahiye ab aisi jagah chal kar jahaan koi na ho
Hamsukhaan koi na ho aur hamzabaan koi na ho

Hamsukhan:- सुख दुःख बांटने वाला
Hamzubaan: एक ज़बान बोलने वाला

ग़ालिब यहां ऐसी जगह जाने की इच्छा बता रहे हैं जहां कोई न हो। जहां वो एक दम अकेले हों।
कोई ऐसा ना हो जो दुख सुख बांट सके। कोई ऐसा ना हो जो मेरी जुबान में बात करे। 

दुनिया में एक ऐसी ही जगह है जहां कोई नही आता और जहां कोई भी हो अकेला ही होता है। वो है कबर ( Grave ).
ग़ालिब यहां मरने की बात कर रहे हैं। 

Be dar-o-dewaar sa ek ghar banaayaa chahiye
Koi hamsaayah na ho aur paasbaan koi na ho

Hamsaya:- Friend/ साथी
Paasbaan: Protector/ रखवाला 

पहले शेर को ही ध्यान में रख कर इसे लिखा गया है। ऐसी जगह जाने की और ऐसा घर बनाने की जहां कोई दरवाजा ना हो और कोई दीवार न हो। कोई साथी न हो और कोई चौकीदार न हो।
यहां भी कबर के बारे में ही कहा जा रहा है। 
ग़ालिब अपने दुख और अकेलेपन को खत्म करने के लिए मरने की इच्छा कर रहे हैं।
क्यों की मरने के बाद ही उनका दुख खत्म हो जाएगा।

Padiye gar bemaar toh koi na ho timardaar
Aur agar mar jaaiye to nauhakhawan koi na ho

Timardaar:- Doctor/ चिकित्सक
Nauhakhwan: रोने वाला

अगर बीमार हुवे तो कोई चिकित्सक/ Doctor ना हो इलाज करने के लिए।
और अगर मार गए तो कोई रोने वाला न हो।
उम्र भर ग़ालिब ने इतना दुख सह है की अब अकेले होने की तमन्ना रखते हैं और ये शेर में उनका दर्द साफ दिख रहा है।


Sunday, July 24, 2022

Translation :- Aah ko chahiye ek umr asar hote tak ( Mirza Ghalib )


Aah ko chahiye ek umr asar hote tak
Kaun jeeta hai tere zulf ke sar hote tak

ग़ालिब कहते हैं कि उनको अपने इशारों को महबूब के दिल पर असर करने में कई अरसा लग जाएगा।
और उस असर को तब देखने के लिए मैं जिंदा रहूंगा भी।
कौन इतना जिएगा तुम्हारी जुल्फों को गुठ बनते तक।
बालों के रेशे को सर के ऊपर गूठ बनते देखने को यहां ग़ालिब "जीवन के रहस्यमय तरीके" को भी दर्शा रहे हैं।
क्या पता जब तक तुम अपने बालों में व्यस्त रहोगे तब तक मैं तुम्हारे ध्यान अपनी ओर होते हुवे देख भी पाऊंगा। उससे पहले ही मर जाऊंगा।

Zulf ka sar hona:- मेरी बात तुम तक पोहोंच जाना। मेरे हाथ तेरी जुल्फ तक पोहोंच जाए या फिर मेरी बात तुम समझ जाए। मतलब जिसको चाहते हो उसको अपना बना लेना।

" जुल्फ का सर होना " ही मेरी आह है, मेरी पुकार है। और इस आह को मुकम्मल होने के लिए एक उम्र चाहिए। इतनी जल्दी ये मुकम्मल नही होगा।


Daam-e-har-mauj meiñ hai halqa-e-sad-kaam-e-nahang
Dekhain kya guzre hai qatre pe guhar hote tak

Daam:- जाल / Net
Halka:- गले की रिंग / ring
Sad:- सौ/ 100
Kaam:- मुंह/ mouth
Nahang:- मगरमच्छ/ Crocodile 
Guhar / Gauhar:- jewelry/ ज़ेवर 

इस शेर में कहते हैं की जब एक बारिश का कतरा गिरता है आसमान से तो उसकी ख्वाहिश होती है सीप ( Oyester) के खुले हुवे मुंह में गिरना जिसके बाद वो सीप का मुंह बंद हो जाएगा और वो बारिश का कतरा मोती बन जाएगा।
मगर जब बारिश का कतरा टपकता है तो नीचे कई जाल बिछे रहते हैं और मगरमच्छ भी मुंह खोल कर बैठा रहता है। मगरमच्छ के मुंह में एक हल्का होता है जो सीप की तरह ही दिखता है।

(1st Line) अब कतरे को अपने अंदर सामने के लिए जाल है, मगरमच्छ है, और सीप है। 

(2nd line) देखते हैं की उस कतरे को क्या मिलता है, जाल, मगरमच्छ का मुंह, या सीप।

Ham ne maana ki taghaful na karoge lekin
Khaak ho jaenge ham tum ko khabar hote tak

मुझे पता है की जब तुमको ये ख़बर लगेगी की मेरी तबियत ख़राब है तो तुम सुनते ही दौड़ी चली आओगी। देर नही करोगी।

लेकिन जो ख़बर लेके जाएगा, वो तो देर से आएगा तुम तक। तुम को वो देर से ख़बर करेगा।
जब तक मेरी ख़बर तुम तक पोहोंचेगी , में ख़ाक में मिल जाऊंगा, मर जाऊंगा।


Partav-e-khur se hai shabnam ko fana'a ki taaleem
Main bhi hoon ek inaayat ki nazar hote tak

Partav:- light / रौशनी
Khur:- Sun/ खुर्शीद
Shabnam:- Dew drop / ओस की बूंद
Fana:- Destroy / बर्बाद
Taaleem:- Learning/ सीख

जब भी शबनम का कतरा गिरता है, उस पर सूरज की रौशनी गिरती है। और वो रौशनी उसे कहती है की मेरे अंदर रौशनी तो है पर उसमे गर्मी भी है। मैं अपनी गर्मी से तुम को फना कर सकती हूं बर्बाद कर सकती हूं।
रौशनी देते हुवे वो उसे फना होने की तालीम भी दे रही है।

इसी तरह में भी एक शबनम का कतरा हूं। आप मुझ पर एक इनायत करें, मैं भी फना हो जाऊंगा। मैं खुद फना हो जाऊंगा।

Ek nazar besh naheen fursat-e-hastee ghaafil
Garmi-e-bazm hai ik raqs-e-sharar hote tak

Besh:- Lots/ ज़्यादा
Fursat-e-hasti:- Duration of Life/ उम्र
Ghaafil:- Careless/ बेपरवाह 
Bazm:- Assembly/ भीड़
Raqs: dance/ नाच
Sharar:- Spark / Chingari

तुम्हारी एक नज़र पड़ना ही काफ़ी है मुझे जिंदगी गुजारने के लिए। तुम बस एक नज़र देख लो मुझे , और वो काफी है मुझे सारी उम्र उस ख़्याल में जीने के लिए।

इसमें एक और मतलब निकल सकता है जो की ऊपर लिखे गए से बिलकुल उल्टा है।

तुम्हारी नज़र सिर्फ काफी नहीं मुझे उम्र बिताने के लिए। मुझे उससे ज्यादा ज़रूरत होगी। तुम्हारी ज़रूरत होगी।

हम दोनो का मिलना वैसा है जैसा चिंगारी का उठना। उसकी गर्मी से मुझे आराम मिलता है। और तुम जब तक पास रहोगे , वो चिंगारी वो गर्मी उठती रहेगी और मुझे आराम मिलता रहेंगा।

Gham-e-hastee ka 'Asad' kis'se ho juz marg ilaaz
Shamma'a har rang mein jaltee hai sahar hote tak

Hastee: Existence/ जीवन
Juz:- Other than/ उसके अलावा
Marg:- Death/ मौत
Sahar:- Morning/ सुबह 

जिंदगी में गम का मरने के अलावा और कोई इलाज नहीं। बस मौत ही गम को मिटा सकता है।

जिंदगी में हर तरह की फीलिंग्स/ भावनाओं से हम गुजरते हैं, जिंदगी में हर तरह के लम्हे आते हैं जैसे दुख ,सुख, घुरबती, अमीरी etc.  जैसे एक चराग जलती है हर रंग में सुबह होने तक, चिराग के खतम होने तक वैसे ही जिंदगी भी एक चिराग की तरह है।

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