Hamsukhaan koi na ho aur hamzabaan koi na ho
Hamsukhan:- सुख दुःख बांटने वाला
Hamzubaan: एक ज़बान बोलने वाला
ग़ालिब यहां ऐसी जगह जाने की इच्छा बता रहे हैं जहां कोई न हो। जहां वो एक दम अकेले हों।
कोई ऐसा ना हो जो दुख सुख बांट सके। कोई ऐसा ना हो जो मेरी जुबान में बात करे।
दुनिया में एक ऐसी ही जगह है जहां कोई नही आता और जहां कोई भी हो अकेला ही होता है। वो है कबर ( Grave ).
ग़ालिब यहां मरने की बात कर रहे हैं।
Be dar-o-dewaar sa ek ghar banaayaa chahiye
Koi hamsaayah na ho aur paasbaan koi na ho
Hamsaya:- Friend/ साथी
Paasbaan: Protector/ रखवाला
पहले शेर को ही ध्यान में रख कर इसे लिखा गया है। ऐसी जगह जाने की और ऐसा घर बनाने की जहां कोई दरवाजा ना हो और कोई दीवार न हो। कोई साथी न हो और कोई चौकीदार न हो।
यहां भी कबर के बारे में ही कहा जा रहा है।
ग़ालिब अपने दुख और अकेलेपन को खत्म करने के लिए मरने की इच्छा कर रहे हैं।
क्यों की मरने के बाद ही उनका दुख खत्म हो जाएगा।
Padiye gar bemaar toh koi na ho timardaar
Aur agar mar jaaiye to nauhakhawan koi na ho
Timardaar:- Doctor/ चिकित्सक
Nauhakhwan: रोने वाला
अगर बीमार हुवे तो कोई चिकित्सक/ Doctor ना हो इलाज करने के लिए।
और अगर मार गए तो कोई रोने वाला न हो।
उम्र भर ग़ालिब ने इतना दुख सह है की अब अकेले होने की तमन्ना रखते हैं और ये शेर में उनका दर्द साफ दिख रहा है।
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