Yaa rab agar in karda gunahoñ ki sazaa hai
Na-karda:- Not Done / नहीं किया
Hasrat:- Wish/ ख्वाहिश
Daad:- Compliment/ तारीफ
इस शेर को समझने के लिए दूसरे शेर को पहले पढ़ें।
2nd line:- अगर किए हुवे गुनाहों की सज़ा मिलेगी।
1st line:- तो फिर उन गुनाहों की तारीफ तो कर जो मेरी ख्वाहिश में ही रह गए, जो मै कर नहीं पाया।
ग़ालिब की अपार और बेमिसाल सोच का एक और उदाहरण इस शेर के जरिए मिलता है। ग़ालिब की सोच हम आम लोगों के सोच के बहुत
No comments:
Post a Comment