Peete to marjate aur na peete to bhi marjate..ll
Bas yahi do masle zindagi bhar na hal hue
Na neend poori hui…na khwaab mukammal hue
Waqt ne kaha….kaash thoda aur sabr hota
Sabr ne kaha…kaash thoda aur waqt hota
Subah subah uthna padta hai kamaane k liye saaheb..
Aaram kamaane nikalta hu aaram chodkar
Hunar sadko par tamasha karta hai
Aur kismat mehlon me raaj karti hai
Shikayate to bahot hai tujhse aye zindagi
Par chup isliye hu ke jo diya tune wo bhi bahuto ko naseeb nahi hota
Ajib soudaagar hai ye waqt bhi
Jawani ka laalach de ke bachpan le gaya
Ab ameeri ka laalach de ke jawani le jaega
Laut aata huñ waapas ghar ki taraf har roz thaka haara
Daulat ki bhukh aisi lagi ki kamane nikal gaye,
Jab daulat mili to hath se rishte nikal gaye
Bachon ke sath rahne ki fursat na mil saki
Fursat mili to bache khud kamane nikal gye
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प्यास लगी थी गजब की…मगर पानी मे जहर था…
पीते तो मर जाते और ना पीते तो भी मर जाते.
बस यही दो मसले, जिंदगीभर ना हल हुए!!!
ना नींद पूरी हुई, ना ख्वाब मुकम्मल हुए!!!
वक़्त ने कहा…..काश थोड़ा और सब्र होता!!!
सब्र ने कहा….काश थोड़ा और वक़्त होता!!!
सुबह सुबह उठना पड़ता है कमाने के लिए साहेब…।।
आराम कमाने निकलता हूँ आराम छोड़कर।।
“हुनर” सड़कों पर तमाशा करता है
और “किस्मत” महलों में राज करती है!!
“शिकायते तो बहुत है तुझसे ऐ जिन्दगी,
पर चुप इसलिये हु कि, जो दिया तूने,
वो भी बहुतो को नसीब नहीं होता”..
अजीब सौदागर है ये वक़्त भी!!!!
जवानी का लालच दे के बचपन ले गया…
अब अमीरी का लालच दे के जवानी ले जाएगा
लौट आता हूँ वापस घर की तरफ… हर रोज़ थका-हारा,
दौलत की भूख ऐसी लगी की कमाने निकल गए
जब दौलत मिली तो हाथ से रिश्ते निकल गए
बच्चों के साथ रहने की फुरसत न मिली कभी
फुरसत मिली तो बच्चे खुद कमाने निकल गए।
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आज तक समझ नहीं आया की जीने के लिए
काम करता हूँ या काम करने के लिए जीता हूँ।
“थक गया हूँ तेरी नौकरी से ऐ जिन्दगी
मुनासिब होगा मेरा हिसाब कर दे…!!”
भरी जेब ने ‘ दुनिया ‘ की पहेचान करवाई और खाली जेब ने ‘ अपनो ‘ की.
जब लगे पैसा कमाने, तो समझ आया,
शौक तो मां-बाप के पैसों से पुरे होते थे,
अपने पैसों से तो सिर्फ जरूरतें पुरी होती है। …!!!
हंसने की इच्छा ना हो…
तो भी हसना पड़ता है…
कोई जब पूछे कैसे हो…??
तो मजे में हूँ कहना पड़ता है…
ये ज़िन्दगी का रंगमंच है दोस्तों….
यहाँ हर एक को नाटक करना पड़ता है.
“माचिस की ज़रूरत यहाँ नहीं पड़ती…
यहाँ आदमी आदमी से जलता है…!!”
दुनिया के बड़े से बड़े साइंटिस्ट,
ये ढूँढ रहे है की मंगल ग्रह पर जीवन है या नहीं,
पर आदमी ये नहीं ढूँढ रहा
कि जीवन में मंगल है या नहीं।
गए थे गुनाहों की माफ़ी माँगने
वहाँ एक और गुनाह कर आए हम ।
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Pyas lagi thi gazab ki magar paani mei zehar tha
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